#गुढाचंद्रजी परीक्षेत्र में विधायक #श्रीघनश्यामजी मैहर ने परिंदों के लिए बांधे परिंडे 🌷🌷🙏🙏=दिनांक 18 मई 2020 को कोरोना वैश्विक महामारी के कारण लॉक डाउन होने की वजह से हजारों बेसहारा बेजुबान पक्षियों के सामने पानी की समस्या उत्पन्न हो गई है उनका जीवन बचाने हेतु टोडाभीम के लाडले पूर्व विधायक सम्मानीय #श्रीघनश्यामजी मैहर के द्वारा परिंडे अभियान के पहले दिन 1 दर्जन से अधिक जगहों पर पेड़ों पर परिंडे लगाकर उनमें पानी की व्यवस्था की, #मेहरसाहब के द्वारा पाड़वाले बालाजी पर परिंडे लगाकर अभियान का शुभारंभ किया और हनुमान जी महाराज से कोरोना जैसी वैश्विक महामारी से हमारे देश को निजात दिलाने की प्रार्थना की ,मेहर साहब की टीम के द्वारा टोडाभीम विधानसभा क्षेत्र में सैकड़ों जगह परिंडे लगाए जाएंगे, इस पुनीत कार्य में साहब के साथ डॉक्टर लक्ष्मण सिंह जी , युवा नेता हिम्मत सिंह दड़गस ,युवा नेता रिंकेश गिदानी, भाई हनुमान पाल वाले , रणजीत चपराना , ,श्री विशंभर दयाल जी , प्रेम चंद जैन, रमाकांत खंडेलवाल , सीपी जोशी केबीएसएस निदेशक भीम सिंह मीणा आदि साथ रहे ,इस पुण्य कार्य के लिए सम्मानीय श्री घनश्याम जी मैहर साहब आपका सभी क्षेत्रवासी तहे दिल से आभार व्यक्त करते है धन्यवाद💐💐💐🙏🙏🙏
मंगलवार, 19 मई 2020
बजरंग दल कार्य कर्ता कर रहे है बीमार गौ वंश की सेवा
रात्रि 8.30 बजे बजरंग दल कार्य कर्ता कर रहे है बीमार गौ वंश की सेवा
कोरोना महामारी के दौरान बजरंग दल कार्यकर्ता गौ सेवा में
लगे हुए हैं
भूतों का पुरा के पास खेतों में एक बीमार गाय की सूचना मिलने पर
बजरंग दल विभाग संयोजक अशोक जैमिनि, जिला संयोजक वीरेन्द्र मास्टर, प्रखण्ड मंत्री संतोष गुर्जर, विक्रम सिंह, मुकेश, रामवीर, देवी सिंह आदि कार्य कर्ता पहुंचे और चारे पानी की व्यवस्था की
डॉ भूपेन्द्र चौधरी एवं सहयोगी राहुल सोनी ने गाय का उपचार किया
कोरोना महामारी के दौरान बजरंग दल कार्यकर्ता गौ सेवा में
लगे हुए हैं
भूतों का पुरा के पास खेतों में एक बीमार गाय की सूचना मिलने पर
बजरंग दल विभाग संयोजक अशोक जैमिनि, जिला संयोजक वीरेन्द्र मास्टर, प्रखण्ड मंत्री संतोष गुर्जर, विक्रम सिंह, मुकेश, रामवीर, देवी सिंह आदि कार्य कर्ता पहुंचे और चारे पानी की व्यवस्था की
डॉ भूपेन्द्र चौधरी एवं सहयोगी राहुल सोनी ने गाय का उपचार किया
रविवार, 17 मई 2020
लेखक :-डॉ बृजेंद्र सिंह बदलता परिवेश भटकते युवा
लेखक :-डॉ बृजेंद्र सिंह
बदलता परिवेश भटकते युवा
आज एक ऐसा विषय जिसने संपूर्ण जनमानस को झकझोर कर रखा हुआ है, ऐसा यक्ष प्रश्न जो संवेदनशील मानव के अंतर्मन को दुख भी देता है, व्यथा भी पैदा करता है, सोचने के लिए मजबूर करता है, नैतिकता के उपदेश देने के लिए मजबूर करता है ,परंतु समाधान के विषय में सोचते हैं तो अंततः मानव हार मान कर ठगा सा महसूस करता है, मैं आपको ले जाना चाहता हूं ,जिसे आप दरिंदगी कहे, दुष्कर्म कहें,' बलात्कार कहे, बहसईपन कहें .राक्षस वृत्ति कहें .अज्ञान कहें .या भ्रमित युवाओं की भ्रमित मानसिकता कहें, व्यक्ति की अनैतिक राक्षसी प्रवृत्ति की पराकाष्ठा कहें, सबका अर्थ एक ही है, परंतु इसके पीछे कारण क्या है जिस भारत मां की मातृभूमि में जीवन मूल्य, नैतिकता ,मर्यादा, सच्ची मित्रता ,सदाचार , मानवीयता, सहयोग और दया का भाव अनमोल निधि के रूप में समाहित था, तो इस प्रकार की राक्षसी प्रवृत्ति का जन्म सुरसा राक्षसी की तरह क्यों बढ़ता ही जा रहा है ,जिस सांस्कृतिक विरासत में कहा गया हैकि ए्
"जिस देश के चरित्र से संपूर्ण के विश्व अपने चरित्र की शिक्षा लेता है"
उसी देश में यह दरिंदगी का अभिशाप बढ़ता ही गया बढ़ता ही जा रहा है, इसके पीछे कहीं ना कहीं बदलता परिवेश है, जिसमें युवा दिग्भ्रमित है ,वास्तव में मानव जन्म सृष्टि की संपूर्ण श्रेष्ठविधा है ,परंतु सृष्टि के चतुर चितेरे ने सात्विक वृत्ति वाले व्यक्ति के अंदर कहां से यह तामसिक वृत्तियां पैदा की इसके पीछे कहीं ना कहीं हम और हमारा परिवेश जिम्मेदार है ,हम हमारी आने वाली पीढ़ी को वह नैतिक गुणों का स्वर्णिम भंडार नहीं दे पाए, जिससे वह अपने चरित्र की रक्षा कर सात्विक प्रवृत्तियों की ओर अग्रसर होकर श्रेष्ठ मानव का जीवन जी पाए ,और श्रेष्ठ आचरण कर सके,
इसके पीछे व्यक्ति की जन्मजात प्रवृत्ति का आधार ,उसके साथ माता पिता के जो संस्कार संतान के प्रति होने चाहिए थे ,उनमें अपनापन का बीज प्राचीन समय मेंमाता पिता देने में सक्षम थे परंतु वर्तमान में भौतिक मनोवृति और समाज के द्वारा केवल आर्थिक उन्नति को ही सामाजिक प्रतिष्ठा के दायरे में सर्वोच्च स्थान देने के कारण माता पिता उसी को बढ़ाने में या अभिवृद्धि करने में संतुष्टि महसूस करता है, और बालमन कुंठित मनोवृत्ति से सम्मिलित होकर धीरे धीरे कुप्रवृत्तियों की ओर अनायास ही बढ़ने लगता है, जिसका आभास मात्र भी अभिभावकों को नहीं हो पाता ,क्रमिक विकास की इस धारा में किशोरावस्था में पहुंचते ही संस्कार विहीन सहपाठियों के सत्संगति से कुंठित एवं कुप्रवृतियां और भी अधिक भयावह स्थान को प्राप्त कर लेती हैं, और नैतिकता , मर्यादा, संस्कार और चरित्र एक कोने में सिसकती हुई नजर आती है, धीरे-धीरे उसका शारीरिक विकास प्रकृति के नियम अनुसार अभिवृद्धि को प्राप्त होता है, और वैचारिक संवेदनाएं शारीरिक अनुभूतियां उसको अपनी ओर आकृष्ट करती है ,इस वक्त उसके बाल मन में जो संस्कार हैं वह जीवन जीने के लिए जीवन मूल्यों की ओर अग्रसर होता है जिसमें सात्विक प्रवृत्ति का पूर्ण अभाव होता है भौतिक मानसिकता वाले तथाकथित आधुनिक कहे जाने वाले, तथाकथित हाई प्रोफाइल कहे जाने वाले, इन संस्कारों में किशोर वह युवा दिग्भ्रमित हो जाता है, और बदलते परिवेश में उसका आचरण तार तार हो जाता है, इस कारण से दरिंदगी का अभिशाप बढ़ता ही जा रहा है, इसके लिए बदलता परिवेश और हम कहीं न कहीं जिम्मेदार हैं, वर्तमान में जब रात्रि के बाद जब नींद खुलती है, समाचार पत्र ,सोशल मीडिया या टीवी चैनल या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, का जब हम पहला क्लिक करते हैं, तो उसमें कहीं न कहीं अनाचार, दरिंदगी , दुष्कर्म, हत्या और बलात्कार का समाचार हमें प्रतिदिन देखने को मिलता है ,परंतु उस समाचार को जिसके साथ घटित हुआ है उसका मानते हुए क्षणिक विचार करते हुए और हम आपाधापी की जिंदगी में फिर व्यस्त हो जाते हैं ,और हमारा नैतिक धर्म भूल जाते हैं, इसके पीछे बहुत बड़ा कारण है, यदि किसी संप्रदाय विशेष की युवा लड़की या स्त्री के साथ यह घटनाएं घटित होती है, तो दूसरा संप्रदाय अंतर्मन में सुकून महसूस करता है, दूसरे संप्रदाय के साथ यह घटना घटित होती है ,तो एक संप्रदाय अपने आप में सहजता महसूस करता है, एक जाति के साथ यह घटना घटित होती है, तो संकीर्ण मनोवृत्ति के कारण दूसरी जाति सहजता का महसूस करती है ,एक धर्म के व्यक्ति के साथ घटना घटित होती है, तो दूसरे धर्म के व्यक्ति सहजता का अनुभव करते हैं ,क्या यही इंसानियत है, क्या यही सांस्कृतिक विरासत है, क्या यही हमारा धर्म है, क्या यही हमारे धार्मिक विरासत की प्रवृत्तियां है। ,इसके पीछे कहीं ना कहीं समाज का बदलता परिवेश ,विचारधारा, स्वार्थ और धार्मिक कट्टरता जिम्मेदार है, राजनीतिक विद्वेषता के वशीभूत होकर के घटनाओं में कुछ तथाकथित समाजसेवी अपनी स्वार्थ की राजनीति को चमकाने के लिए मगरमच्छ के आंसू बहाने पहुंच जाते हैं, और अखबार की सुर्खियों में अपना स्थान प्राप्त कर लेते हैं, इसी दौर में सामाजिक नेता जो अपने जाति संप्रदाय के ठेकेदार हैं ,वह भी निहित स्वार्थ की मानसिकता से समाज में अपना नाम चमकाने के लिए घड़ियाली आंसू बहाने और अत्याचार से द्रवित हुए परिवार जन के साथ कुछ समय के लिए सद्भावना का झूठा दिखावा करता है ।
मित्रों यह कड़वा सत्य है ,जहर का घूंट है, सुनने पर पढ़ने पर बहुत बुरा लगेगा पर यह कहीं न कहीं सच्चाई है, क्या एक धर्म, क्या एक जाति, क्या एक संप्रदाय कि किसी भी स्त्री या बालिका के साथ में दुराचार अनाचार दुष्कर्म होता है , तो क्या संवेदनात्मक स्थितियां इन ढोंगी जनप्रतिनिधि ,सामाजिक नेताओं के समक्ष बदल जाती हैं, यद्यपि क्योंकि मानव इकाई तो एक ही है ,तो क्यों नहीं इस प्रकार की स्थितियों में हम राजनीति,, धर्म ,संप्रदाय जाति आदि से ऊपर उठकर दुष्ट प्रवृत्तियों के शिकार हुई युवा पीढ़ियों का सामूहिक एवं सार्वजनिक बहिष्कार करें
युवा पीढ़ी की दुष्प्रवृत्तियों का बहिष्कार करना, यद्यपि एकमात्र रास्ता नहीं है ,इसके लिए सरकार की वैधानिक व्यवस्था ने विभिन्न प्रकार के कठोर से कठोरतम दंड की व्यवस्था की है, और ऐसे दुष्कर्मी और दुराचारियों को दंड मिला भी है ,परंतु फिर भी यह दरिंदगी रुकने का नाम नहीं ले रही, इसके पीछे कहीं न कहीं पाशविक प्रवृत्ति कारण है, वैधानिक व्यवस्थाएं अपना कार्य कर रही हैं, परंतु मित्रों हमारा भी अपना एक कर्तव्य है ,कि किस प्रकार से इस दिग्भ्रमित युवा पीढ़ी को हम सही रास्ते पर लाएं उनके अंदर पल रही पाशविक के प्रवृत्ति को मानवीय प्रवृत्ति की ओर सात्विकता की ओर ले जाएं ,इसके लिए हमें एक दूसरे धर्म, संप्रदाय ,जाति के सिद्धांतों की बुराई करके संस्कृति के सिद्धांतों का जो उपहास उड़ा रहे हैं, कहीं न कहीं कारण है, हमारे युवा पीढ़ी को समझना होगा और नागरिक को इन युवा पीढ़ियों के अंतः पटल के अंदर नैतिकता के भाव को जन्म देना होगा, यदि इसी प्रकार की वृत्तियां लगातार चलती रही तो वह दिन दूर नहीं जब यह युवा पीढ़ी दिन प्रतिदिन और अधिक वहशिपन की ओर अग्रसर होती रहेगी, मित्रों ज्यादा दूर कहीं नहीं हम अपने परिवार भावी युवा पीढ़ी को ही कम से कम नैतिकता, सदाचार और सात्विक प्रवृत्तियों का जन्म देकर कुत्सित मानसिकता और दुष्टप्रवृत्तियों से निजात दिलाएं
हमारा सब का कर्तव्य बनता है कि हम उनकी भावनाओं को समझें उनकी व्रतियों और व्यवहार को समझें उन्हें सत्य मार्ग और सन्मार्ग की ओर प्रेरित करें ,उन्हें खाली समय में रचनात्मक कार्य करने के लिए प्रेरित करें ,युवा पीढ़ी भावी भविष्य को लेकर अत्यंत संदेहास्पद है, इसलिए उनकी मूल प्रवृत्ति को समझकर उनके अंदर समय की सदुपयोगता, और व्यस्तता को बढ़ाना पड़ेगा, तथा सभी को सोचना पड़ेगा नहीं ,तो यह समस्या दिनोंदिन बढ़ती जाएगी
और हम कुछ नहीं कर पाएंगे अतः इस बदलते परिवेश में भ्रमित युवाओं को श्रेष्ठ मार्ग की ओर ले जाने के लिए बुद्धिजीवियों और सकारात्मक सोच वाले नागरिक बंधुओं को आगे आना होगा और एक विजन की तरह एक लक्ष्य की तरह इस कार्य को करना होगा अन्यथा इसके परिणाम सभी को भोगने पड़ेंगे यह सिसकियां, यह हत्याएं, यह दरिंदगी, वर्तमान स्थितियों से कहीं अधिक भयावह रूप में आपके समक्ष खड़ी मिलेगी, अतः हम सब को जागरूक होना पड़ेगा, हमारी धार्मिक परंपराओं को नैतिक मर्यादाओं को और जीवन मूल्यों को जीवन का एक हिस्सा बनना पड़ेगा यही सबसे बड़ा वर्तमान परिदृश्य में धर्म होगा ,,राष्ट्र निर्माण में कहीं न कहीं हमें युवा पीढ़ी को सन्मार्ग की ओर लगाने के लिए आत्म अवलोकन करना जरूरी है ,और आत्म अवलोकन कर श्रेष्ठता की ओर ले जाने का प्रण लेना पड़ेगा
डॉ बृजेंद्र सिंह
(
यह लेखक केअपने स्वतंत्र विचार है ,इसमें किसी
व्यक्ति ,जाति और संप्रदाय की भावनाओं को आहत करने का उद्देश्य नहीं है)
बदलता परिवेश भटकते युवा
आज एक ऐसा विषय जिसने संपूर्ण जनमानस को झकझोर कर रखा हुआ है, ऐसा यक्ष प्रश्न जो संवेदनशील मानव के अंतर्मन को दुख भी देता है, व्यथा भी पैदा करता है, सोचने के लिए मजबूर करता है, नैतिकता के उपदेश देने के लिए मजबूर करता है ,परंतु समाधान के विषय में सोचते हैं तो अंततः मानव हार मान कर ठगा सा महसूस करता है, मैं आपको ले जाना चाहता हूं ,जिसे आप दरिंदगी कहे, दुष्कर्म कहें,' बलात्कार कहे, बहसईपन कहें .राक्षस वृत्ति कहें .अज्ञान कहें .या भ्रमित युवाओं की भ्रमित मानसिकता कहें, व्यक्ति की अनैतिक राक्षसी प्रवृत्ति की पराकाष्ठा कहें, सबका अर्थ एक ही है, परंतु इसके पीछे कारण क्या है जिस भारत मां की मातृभूमि में जीवन मूल्य, नैतिकता ,मर्यादा, सच्ची मित्रता ,सदाचार , मानवीयता, सहयोग और दया का भाव अनमोल निधि के रूप में समाहित था, तो इस प्रकार की राक्षसी प्रवृत्ति का जन्म सुरसा राक्षसी की तरह क्यों बढ़ता ही जा रहा है ,जिस सांस्कृतिक विरासत में कहा गया हैकि ए्
"जिस देश के चरित्र से संपूर्ण के विश्व अपने चरित्र की शिक्षा लेता है"
उसी देश में यह दरिंदगी का अभिशाप बढ़ता ही गया बढ़ता ही जा रहा है, इसके पीछे कहीं ना कहीं बदलता परिवेश है, जिसमें युवा दिग्भ्रमित है ,वास्तव में मानव जन्म सृष्टि की संपूर्ण श्रेष्ठविधा है ,परंतु सृष्टि के चतुर चितेरे ने सात्विक वृत्ति वाले व्यक्ति के अंदर कहां से यह तामसिक वृत्तियां पैदा की इसके पीछे कहीं ना कहीं हम और हमारा परिवेश जिम्मेदार है ,हम हमारी आने वाली पीढ़ी को वह नैतिक गुणों का स्वर्णिम भंडार नहीं दे पाए, जिससे वह अपने चरित्र की रक्षा कर सात्विक प्रवृत्तियों की ओर अग्रसर होकर श्रेष्ठ मानव का जीवन जी पाए ,और श्रेष्ठ आचरण कर सके,
इसके पीछे व्यक्ति की जन्मजात प्रवृत्ति का आधार ,उसके साथ माता पिता के जो संस्कार संतान के प्रति होने चाहिए थे ,उनमें अपनापन का बीज प्राचीन समय मेंमाता पिता देने में सक्षम थे परंतु वर्तमान में भौतिक मनोवृति और समाज के द्वारा केवल आर्थिक उन्नति को ही सामाजिक प्रतिष्ठा के दायरे में सर्वोच्च स्थान देने के कारण माता पिता उसी को बढ़ाने में या अभिवृद्धि करने में संतुष्टि महसूस करता है, और बालमन कुंठित मनोवृत्ति से सम्मिलित होकर धीरे धीरे कुप्रवृत्तियों की ओर अनायास ही बढ़ने लगता है, जिसका आभास मात्र भी अभिभावकों को नहीं हो पाता ,क्रमिक विकास की इस धारा में किशोरावस्था में पहुंचते ही संस्कार विहीन सहपाठियों के सत्संगति से कुंठित एवं कुप्रवृतियां और भी अधिक भयावह स्थान को प्राप्त कर लेती हैं, और नैतिकता , मर्यादा, संस्कार और चरित्र एक कोने में सिसकती हुई नजर आती है, धीरे-धीरे उसका शारीरिक विकास प्रकृति के नियम अनुसार अभिवृद्धि को प्राप्त होता है, और वैचारिक संवेदनाएं शारीरिक अनुभूतियां उसको अपनी ओर आकृष्ट करती है ,इस वक्त उसके बाल मन में जो संस्कार हैं वह जीवन जीने के लिए जीवन मूल्यों की ओर अग्रसर होता है जिसमें सात्विक प्रवृत्ति का पूर्ण अभाव होता है भौतिक मानसिकता वाले तथाकथित आधुनिक कहे जाने वाले, तथाकथित हाई प्रोफाइल कहे जाने वाले, इन संस्कारों में किशोर वह युवा दिग्भ्रमित हो जाता है, और बदलते परिवेश में उसका आचरण तार तार हो जाता है, इस कारण से दरिंदगी का अभिशाप बढ़ता ही जा रहा है, इसके लिए बदलता परिवेश और हम कहीं न कहीं जिम्मेदार हैं, वर्तमान में जब रात्रि के बाद जब नींद खुलती है, समाचार पत्र ,सोशल मीडिया या टीवी चैनल या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, का जब हम पहला क्लिक करते हैं, तो उसमें कहीं न कहीं अनाचार, दरिंदगी , दुष्कर्म, हत्या और बलात्कार का समाचार हमें प्रतिदिन देखने को मिलता है ,परंतु उस समाचार को जिसके साथ घटित हुआ है उसका मानते हुए क्षणिक विचार करते हुए और हम आपाधापी की जिंदगी में फिर व्यस्त हो जाते हैं ,और हमारा नैतिक धर्म भूल जाते हैं, इसके पीछे बहुत बड़ा कारण है, यदि किसी संप्रदाय विशेष की युवा लड़की या स्त्री के साथ यह घटनाएं घटित होती है, तो दूसरा संप्रदाय अंतर्मन में सुकून महसूस करता है, दूसरे संप्रदाय के साथ यह घटना घटित होती है ,तो एक संप्रदाय अपने आप में सहजता महसूस करता है, एक जाति के साथ यह घटना घटित होती है, तो संकीर्ण मनोवृत्ति के कारण दूसरी जाति सहजता का महसूस करती है ,एक धर्म के व्यक्ति के साथ घटना घटित होती है, तो दूसरे धर्म के व्यक्ति सहजता का अनुभव करते हैं ,क्या यही इंसानियत है, क्या यही सांस्कृतिक विरासत है, क्या यही हमारा धर्म है, क्या यही हमारे धार्मिक विरासत की प्रवृत्तियां है। ,इसके पीछे कहीं ना कहीं समाज का बदलता परिवेश ,विचारधारा, स्वार्थ और धार्मिक कट्टरता जिम्मेदार है, राजनीतिक विद्वेषता के वशीभूत होकर के घटनाओं में कुछ तथाकथित समाजसेवी अपनी स्वार्थ की राजनीति को चमकाने के लिए मगरमच्छ के आंसू बहाने पहुंच जाते हैं, और अखबार की सुर्खियों में अपना स्थान प्राप्त कर लेते हैं, इसी दौर में सामाजिक नेता जो अपने जाति संप्रदाय के ठेकेदार हैं ,वह भी निहित स्वार्थ की मानसिकता से समाज में अपना नाम चमकाने के लिए घड़ियाली आंसू बहाने और अत्याचार से द्रवित हुए परिवार जन के साथ कुछ समय के लिए सद्भावना का झूठा दिखावा करता है ।
मित्रों यह कड़वा सत्य है ,जहर का घूंट है, सुनने पर पढ़ने पर बहुत बुरा लगेगा पर यह कहीं न कहीं सच्चाई है, क्या एक धर्म, क्या एक जाति, क्या एक संप्रदाय कि किसी भी स्त्री या बालिका के साथ में दुराचार अनाचार दुष्कर्म होता है , तो क्या संवेदनात्मक स्थितियां इन ढोंगी जनप्रतिनिधि ,सामाजिक नेताओं के समक्ष बदल जाती हैं, यद्यपि क्योंकि मानव इकाई तो एक ही है ,तो क्यों नहीं इस प्रकार की स्थितियों में हम राजनीति,, धर्म ,संप्रदाय जाति आदि से ऊपर उठकर दुष्ट प्रवृत्तियों के शिकार हुई युवा पीढ़ियों का सामूहिक एवं सार्वजनिक बहिष्कार करें
युवा पीढ़ी की दुष्प्रवृत्तियों का बहिष्कार करना, यद्यपि एकमात्र रास्ता नहीं है ,इसके लिए सरकार की वैधानिक व्यवस्था ने विभिन्न प्रकार के कठोर से कठोरतम दंड की व्यवस्था की है, और ऐसे दुष्कर्मी और दुराचारियों को दंड मिला भी है ,परंतु फिर भी यह दरिंदगी रुकने का नाम नहीं ले रही, इसके पीछे कहीं न कहीं पाशविक प्रवृत्ति कारण है, वैधानिक व्यवस्थाएं अपना कार्य कर रही हैं, परंतु मित्रों हमारा भी अपना एक कर्तव्य है ,कि किस प्रकार से इस दिग्भ्रमित युवा पीढ़ी को हम सही रास्ते पर लाएं उनके अंदर पल रही पाशविक के प्रवृत्ति को मानवीय प्रवृत्ति की ओर सात्विकता की ओर ले जाएं ,इसके लिए हमें एक दूसरे धर्म, संप्रदाय ,जाति के सिद्धांतों की बुराई करके संस्कृति के सिद्धांतों का जो उपहास उड़ा रहे हैं, कहीं न कहीं कारण है, हमारे युवा पीढ़ी को समझना होगा और नागरिक को इन युवा पीढ़ियों के अंतः पटल के अंदर नैतिकता के भाव को जन्म देना होगा, यदि इसी प्रकार की वृत्तियां लगातार चलती रही तो वह दिन दूर नहीं जब यह युवा पीढ़ी दिन प्रतिदिन और अधिक वहशिपन की ओर अग्रसर होती रहेगी, मित्रों ज्यादा दूर कहीं नहीं हम अपने परिवार भावी युवा पीढ़ी को ही कम से कम नैतिकता, सदाचार और सात्विक प्रवृत्तियों का जन्म देकर कुत्सित मानसिकता और दुष्टप्रवृत्तियों से निजात दिलाएं
हमारा सब का कर्तव्य बनता है कि हम उनकी भावनाओं को समझें उनकी व्रतियों और व्यवहार को समझें उन्हें सत्य मार्ग और सन्मार्ग की ओर प्रेरित करें ,उन्हें खाली समय में रचनात्मक कार्य करने के लिए प्रेरित करें ,युवा पीढ़ी भावी भविष्य को लेकर अत्यंत संदेहास्पद है, इसलिए उनकी मूल प्रवृत्ति को समझकर उनके अंदर समय की सदुपयोगता, और व्यस्तता को बढ़ाना पड़ेगा, तथा सभी को सोचना पड़ेगा नहीं ,तो यह समस्या दिनोंदिन बढ़ती जाएगी
और हम कुछ नहीं कर पाएंगे अतः इस बदलते परिवेश में भ्रमित युवाओं को श्रेष्ठ मार्ग की ओर ले जाने के लिए बुद्धिजीवियों और सकारात्मक सोच वाले नागरिक बंधुओं को आगे आना होगा और एक विजन की तरह एक लक्ष्य की तरह इस कार्य को करना होगा अन्यथा इसके परिणाम सभी को भोगने पड़ेंगे यह सिसकियां, यह हत्याएं, यह दरिंदगी, वर्तमान स्थितियों से कहीं अधिक भयावह रूप में आपके समक्ष खड़ी मिलेगी, अतः हम सब को जागरूक होना पड़ेगा, हमारी धार्मिक परंपराओं को नैतिक मर्यादाओं को और जीवन मूल्यों को जीवन का एक हिस्सा बनना पड़ेगा यही सबसे बड़ा वर्तमान परिदृश्य में धर्म होगा ,,राष्ट्र निर्माण में कहीं न कहीं हमें युवा पीढ़ी को सन्मार्ग की ओर लगाने के लिए आत्म अवलोकन करना जरूरी है ,और आत्म अवलोकन कर श्रेष्ठता की ओर ले जाने का प्रण लेना पड़ेगा
डॉ बृजेंद्र सिंह
(
यह लेखक केअपने स्वतंत्र विचार है ,इसमें किसी
व्यक्ति ,जाति और संप्रदाय की भावनाओं को आहत करने का उद्देश्य नहीं है)
अस्तित्व की उडान संगठन के द्वारा सुरेश मीना जी और अमरसिंह मीना जी के सहयोग से संगठन अध्यक्षा श्री मती अनीता मीना कटकड व्याख्याता ने सूरोठ चैक पोस्ट पर तैनात स्वास्थ्य
अस्तित्व की उडान संगठन के द्वारा सुरेश मीना जी और अमरसिंह मीना जी के सहयोग से संगठन अध्यक्षा श्री मती अनीता मीना कटकड व्याख्याता ने सूरोठ चैक पोस्ट पर तैनात स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों श्री मान अभिराज मीना व आयुर्वेदिक डौक्टर श्री मान धर्मेंद्र शर्मा , शिक्षा विभाग के अधिकारी प्रधानाचार्य श्री गोपाल सिंह डागुर व समस्त स्टाफ जो की ड्यूटी पर तैनात था ,तथा पुलिस विभाग के अधिकारी कैलाश चंद वैरवा व चौकी इंचार्ज भूरसिंह जाटव ए एस आई श्री कंवर सिंह गुर्जर हैंड कोंसटेबल रामकुमार जी के साथ तहसीलदार श्री मान रामराय मीना जी व अन्य सभी सहयोगी नागरिकों का साफा व माला पहनाकर सम्मानित किया ।
संगठन अध्यक्ष श्री मती मीना ने सर्वप्रथम संगठन का विस्तृत परिचय दिया साथ ही कोरोना मुहीम की जानकारी दी जिसके तहत 19 मार्च से राजकीय चिकित्सालय हिंडौन सिटी में मरीजों को पंपलेट्स और फल वितरित करके अभियान की शुरुआत की गयी थी। जिसके तहत संपूर्ण राजस्थान में संगठन की कार्यकर्ता मास्क, रसद सामग्री, भोजन किट और फलों का वितरण कर रही हैं साथ ही पुलिसकर्मियों, सफाईकर्मियों,व शिक्षक कोरोना योद्धाओं का सम्मान व प्रोत्साहन दिया जा रहा है ।
गौरतलब है की अनीता जी को हाल ही गांधी पीस फाउंडेशन नेपाल के द्वारा अंतरराष्ट्रीय अवार्ड से सम्मानित किया गया है और अनेकों राष्ट्रीय अवार्ड प्राप्त हो चुके हैं ।
श्री मान अमरसिंह जी के द्वारा समस्त कर्मचारियों को प्रोत्साहन प्रदान किया और संभावित सावधानियों के बारे में जानकारी दी
श्री मान सुरेश मीना जी ने चैक पोस्ट पर तैनात समस्त कर्मचारियों को जरूरी निर्देश दिए जिनके द्वारा व्यवस्था को मजबूत किया जा सके और महामारी की भयावहता से बचा जा सके साथ ही जनता को भी दुष्प्रभाव से बचाया जा सके ।
कार्यक्रम के अंत में चैक पोस्ट प्रभारी श्री मान प्रधानाचार्य गोपाल सिंह जी ने संगठन का आभार व्यक्त किया साथ ही स्वास्थ्य विभाग, पुलिस कर्मियों , आयुर्वेद चिकित्सक, तथा शिक्षक कोरोना योद्धाओं को धन्यवाद ज्ञापित किया उनके कर्त्तव्य पालन के लिए ।
इस समय अनीता मीना कटकड , अमरसिंह मीना ,सुरेश मीना ,विजय सिंह मीना व्याख्याता,शिवकेशमीना ,आभास शर्मा , अभिराज मीना, धर्मेंद्र शर्मा ,
"मजबूर मजदूर और दम तोड़ती इंन्सानियत " प्रोफेसर रामकेश आदिवासी सह आचार्य ,संस्कृत राजकीय महाविद्यालय, गंगापुर सिटी
"मजबूर मजदूर और दम तोड़ती इंन्सानियत
"
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹
आँखे भर आती है जब ,देखता हूँ इस मंजर को ,
भूखे मजदूर के सीने पर ,चलते हुए खंजर को।
दर्द बहुत है सीने में , पर सिसकिया नहीं निकलती है,
दूर बहुत है मंजिल, इसलिये धमनिया भी नहीं रुकती है ।
क्या करें वह बेवस है , कुछ आस लिए चलता है ,
मधुर सपने सजोंयें , मिलने की प्यास लिए चलता है।
बदकिस्मती उसकी देखो,, जो मौत बनके चली आती है ,
पहले थकाती है ,फिर सुलाती ,और अपने साथ ही लिये जाती है।
सड़क पर चल रहा था , गुनगुनाता ,हँसता बेपरवान,
निर्दयी नियति ने कुचल दिए ,उसके सब अरमान ।
हाल यह विचित्र है ,सब कुछ सचित्र है,
ना कोई किसी का दुश्मन, ना ही अब मित्र है ।
कोई सो रहा महल में ,कोई उलझ रहा झाड़ियों में
विधाता की मर्जी देखो ,कोई जुत रहा गाड़ीयों में।
चुपचाप चल रहे सब मिलकर, मशगूर थे सब बतियाने में '
बेरहम किस्मत की टक्कर से , इंसान मिल रहे माटी में।
किसी ने तपन से दम तोड़ा ,किसी ने गमन से दम तोड़ा है ,
किसी ने सोते से दम तोड़ा, किसी ने गम में दम तोड़ा है।
साहब जिससे गुजरती है ,उसे ही उसे पता चलता है ,
चूल्हा भी नहीं जला उनके घर, इसलिये भूखे ने दम तोड़ा है ।
कर लो अत्याचार , ये है बेबस और लाचार मजदूर की हताशा,
जब निकलेगी हाय, तो बचा भी ना पाएगा तुम्हें विधाता।
यह दर्द ऐसा है आदिवासी, सिसकियां भी नहीं निकलती ,
रोना हर कोई चाहता है , पर फफकियाँ भी नहीं निकलती
आज वही शख्स ,यादों की बारात लिये रोते हुये जा रहा ,
रूठ कर वो तुमसे कभी ना आने की, कसम खायें जा रहा
गुजारिश है आपसे ,मजदूर का सम्मान दिल से करो आदिवासी,
यह तो बुरे वक्त की बातें हैं ,ना खुद पर गुमान करो हे देशवासी I
यह वेवक्त का दौर है, इक दिन यह भी चला जायेगा,
तुम्हारे महल बनाने के लिये,फिर यही मजदूर आयेगा।
खून पसीने से तरबतर , जो आज यह बदहाल है,
कारण हो तुम्हीं इसका, यह बहुत बड़ा सवाल है ।
सुलझाना पाओगे तुम इसको, अब इसे प्रश्न ही रहने दो
जीओ तुम तो जी भरके, मगर इसे भी शुकून से जीने दो।
------------------
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹
प्रोफेसर रामकेश आदिवासी
सह आचार्य ,संस्कृत
राजकीय महाविद्यालय, गंगापुर सिटी
दूरभाष नंबर 9887 99 5480 ईमेल rkadivasi57@gmail.com
🌸🌸🌸👏👏👏🌸🌸🌸
"
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹
आँखे भर आती है जब ,देखता हूँ इस मंजर को ,
भूखे मजदूर के सीने पर ,चलते हुए खंजर को।
दर्द बहुत है सीने में , पर सिसकिया नहीं निकलती है,
दूर बहुत है मंजिल, इसलिये धमनिया भी नहीं रुकती है ।
क्या करें वह बेवस है , कुछ आस लिए चलता है ,
मधुर सपने सजोंयें , मिलने की प्यास लिए चलता है।
बदकिस्मती उसकी देखो,, जो मौत बनके चली आती है ,
पहले थकाती है ,फिर सुलाती ,और अपने साथ ही लिये जाती है।
सड़क पर चल रहा था , गुनगुनाता ,हँसता बेपरवान,
निर्दयी नियति ने कुचल दिए ,उसके सब अरमान ।
हाल यह विचित्र है ,सब कुछ सचित्र है,
ना कोई किसी का दुश्मन, ना ही अब मित्र है ।
कोई सो रहा महल में ,कोई उलझ रहा झाड़ियों में
विधाता की मर्जी देखो ,कोई जुत रहा गाड़ीयों में।
चुपचाप चल रहे सब मिलकर, मशगूर थे सब बतियाने में '
बेरहम किस्मत की टक्कर से , इंसान मिल रहे माटी में।
किसी ने तपन से दम तोड़ा ,किसी ने गमन से दम तोड़ा है ,
किसी ने सोते से दम तोड़ा, किसी ने गम में दम तोड़ा है।
साहब जिससे गुजरती है ,उसे ही उसे पता चलता है ,
चूल्हा भी नहीं जला उनके घर, इसलिये भूखे ने दम तोड़ा है ।
कर लो अत्याचार , ये है बेबस और लाचार मजदूर की हताशा,
जब निकलेगी हाय, तो बचा भी ना पाएगा तुम्हें विधाता।
यह दर्द ऐसा है आदिवासी, सिसकियां भी नहीं निकलती ,
रोना हर कोई चाहता है , पर फफकियाँ भी नहीं निकलती
आज वही शख्स ,यादों की बारात लिये रोते हुये जा रहा ,
रूठ कर वो तुमसे कभी ना आने की, कसम खायें जा रहा
गुजारिश है आपसे ,मजदूर का सम्मान दिल से करो आदिवासी,
यह तो बुरे वक्त की बातें हैं ,ना खुद पर गुमान करो हे देशवासी I
यह वेवक्त का दौर है, इक दिन यह भी चला जायेगा,
तुम्हारे महल बनाने के लिये,फिर यही मजदूर आयेगा।
खून पसीने से तरबतर , जो आज यह बदहाल है,
कारण हो तुम्हीं इसका, यह बहुत बड़ा सवाल है ।
सुलझाना पाओगे तुम इसको, अब इसे प्रश्न ही रहने दो
जीओ तुम तो जी भरके, मगर इसे भी शुकून से जीने दो।
------------------
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹
प्रोफेसर रामकेश आदिवासी
सह आचार्य ,संस्कृत
राजकीय महाविद्यालय, गंगापुर सिटी
दूरभाष नंबर 9887 99 5480 ईमेल rkadivasi57@gmail.com
🌸🌸🌸👏👏👏🌸🌸🌸
सीपी जोशी, समाजसेवी भाई राहुल जामडोली ,KBSSडायरेक्टर भीमसिंह मीणा आदि साथ रहे , #गुढ़ाचंद्रजी-क्षेत्रवासियों की तरफ से मेहर साहब का बहुत-बहुत आभार
गुढाचंद्रजी दिनांक 17मई 2020 को जन जन के लाडले गरीबों के मसीहा टोडाभीम के पूर्व विधायक सम्मानीय भाई #श्रीघनश्यामजी-मेहरसाहब पहुंचे गरीबों की मंदिर रूपी कुटिया पे और कोरोना जैसी वैश्विक महामारी के चलते हो रही समस्या' को देखते हुए #गुढ़ाचंद्रजी परिक्षेत्र मैं गरीब असहाय जरूरतमंद लोगों को #राशनसामग्री ,मास्क और बच्चों को #बिस्किट-कुरकुरे बांटे एवं खर्चे के लिए गरीब लोगों को #नकद-रुपए भी भेंट किएऔर सभी को कोरोना से बचाव के लिए #सोशलडिस्टेंस ,मास्क लगाना ,साबुन से हाथ धोना ,घर पर ही रहना आदि सुझाव दिए, इस पुनीत कार्य में साहब के साथ भाई विशंभर दयाल गोयल ,युवा नेता भाई रिंकेश गिदानी, भाई हिम्मत सिंह दडगस, भाई रणजीत चपराना, भाई श्याम मेहर ,समाजसेवी भाई प्रेमचंद जैन ,भाई हनुमान पाल वाले , , भाई प्रमोद मेडिकल ,भाई रमाकांत खंडेलवाल ,डॉक्टर लक्ष्मण सिंह सैनी ,सीपी जोशी, समाजसेवी भाई राहुल जामडोली ,KBSSडायरेक्टर भीमसिंह मीणा आदि साथ रहे , #गुढ़ाचंद्रजी-क्षेत्रवासियों की तरफ से मेहर साहब का बहुत-बहुत आभार व धन्यवाद ,जो इस संकट की घड़ी में गरीबों के घर-घर पहुंचकर गरीबों की मदद कर रहे हैं ,आप पर ईश्वर की कृपा दृष्टि हमेशा बनी रहे ,ऐसी हम सभी क्षेत्रवासी प्रभु से कामना करते हैं 🌷🌷🙏🙏
शनिवार, 16 मई 2020
गंगापुर सिटी के पास गंगा जी कि कोटी के जंगल के कुऐ में एक व्यक्ति की लाश पड़ी
गंगापुर सिटी के पास गंगा जी कि कोटी के जंगल के कुऐ में एक व्यक्ति की लाश पड़ी
हुई कि सूचना पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हिमांशु शर्मा व डी वाई एस पी किशोरीलाल, कोतवाली थाना अधिकारी दिग्विजय सिंह उदेई मोड़ थाना अधिकारी जगदीश भारद्वाज सदर थाना अधिकारी भरत सिंह सहित मौके पर पहुंचे और वहा भीड़ भी इक्ट्टी हो रही थी और कुऐ के अन्दर एक व्यक्ति लाश दिखाई दी जिसको गांव वासियों की मदद से बाहर निकलवा कर लाश कि शिनाख्त विजयसिंह पुत्र बाबु जाति माली निवासी महोली जिलि करौली के रुप में हुई
साथ ही घटनास्थल पर एफ एस एल टीम व एम ओ बी टीम भिजवाई जिनके द्वारा सबुत इक्ट्ठा करने पर पाया गया कि मृतक की पत्नी द्वारा अपने देवर के साथ प्रेम संबंधों में बाधक बने पति की शराब पिलाकर हत्या करवा दी गई जिससे इनके प्रेम संबंध बने रह सके
मृतक विजय माली पाच सात साल से गंगा जी की कोटि के हार में गौशाला पर नोकरी करता था उसके साथ उसकी पत्नी व तीनो बच्चे रहते थे पत्नी के अपने काकी सुसर के लड़के से पिछले कुछ समय से अवैध संबंध चल रहे थे और मृतक विजय सिंह शराब पीने का आदि था जिससे अपनी पत्नी को आये दिन मारपीट करता था
जब विजय सिंह को अपनी पत्नी के अवैध संबधों के बारे में पता चलने पर पत्नी की मारपीट की गई और इससे परेशान होकर पत्नी सुरजबाई व प्रेमी देवर ने विजयसिंह कि हत्या की साजिश रची और विजय सिंह को जंगलों के कुऐ के पास अधिक शराब पिलाकर उसे कुऐ में धक्का दे दिया जिससे विजयसिंह कि मौत हो गई और समाचार संकलन करने तक पुलिस के द्वारा पुछताछ जारी रही
कोतवाली गंगापुर सिटी थाने क्षेत्र में एक अज्ञात लाश मिली थी जिसका खुलासा पत्नी द्वारा अपने देवर के साथ अपने पती की हत्या कराने मे हुआ इस कारवाई पर डि आई जी लक्ष्मण गौड़ रेज भरतपुर के द्वारा 5000 हजार रुपये कि ईनाम कि टीम के होसला अफजाई के लिए कि गई
इसके अलावा वाटोदा श्रेत्र के रामसिहपुरा नाके पर चार चौरो को पकडा गया जिसको लेकर डीआईजी लक्ष्मण गौड़ द्वारा नाके पर तैनात पुलिसकर्मियों को 5000 रुपये का नगद पुरस्कार देने कि घोषणा की गई _जिसे_ उनका होसला अफजाई हो
सदस्यता लें
संदेश (Atom)
Gandal में छत के कड़े से लटका मिला युवक का शवः परिजनों ने एक आरोपी के खिलाफ कराया मामला दर्ज, पुलिस जांच में जुटी
बामनवास उपखंड के गंडाल गांव में एक युवक ने छत के कड़े से फंदा लगाकर जान दे दी। मंगलवार शाम को हुई इस घटना के बाद गांव में अफरा-तफरी मच गई। ...
-
गुढ़ाचन्द्रजी। सरकार द्वारा 60 वर्ष की उम्र के अधिक लोगों के लिए लगाए जा रहे कोरोना के टीकाकरण के तहत शनिवार को कस्बे के सामुदायिक स्वास्थ्...
-
वजीरपुर, पुलिस थाना वजीरपुर में एमबी एक्ट के तहत 11 वाहनों का चालान किया पुलिस थाना अधिकारी योगेंद्र शर्मा ने बताया कि सड़क सुरक्षा नियम के...
-
बामनवास उपखंड के गंडाल गांव में एक युवक ने छत के कड़े से फंदा लगाकर जान दे दी। मंगलवार शाम को हुई इस घटना के बाद गांव में अफरा-तफरी मच गई। ...

